श्री यशवंतराव मेघावाले: एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
श्री यशवंतराव मेघावाले छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सामाजिक जीवनधारा के एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनका जन्म 7 अक्टूबर 1926 को एक सम्मानित और राष्ट्रभक्त परिवार में हुआ था। आपकी माता स्वर्गीय श्रीमती भागीरथी वाई तथा पिता स्वर्गीय श्री केशवराव मेघावाले थे। आपके दादा पंडित नारायणराव मेघावाले स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रतिष्ठित सेनानी थे। उनके आदर्शों और राष्ट्रभक्ति ने बाल्यकाल से ही यशवंतराव मेघावाले के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित किया।
श्री मेघावाले ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायपुर में प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई B.A. तक की। शिक्षा के साथ-साथ उनमें समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा भाव प्रबल होता गया। यही कारण था कि उन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा को समर्पित कर दिया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1953 में धमतरी जनपद के उपाध्यक्ष के रूप में हुई। यह उनके नेतृत्व कौशल और जनसेवा की भावना का प्रारंभिक चरण था। आगे चलकर उन्होंने 1962, 1972 और 1977 में कुरुद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और जनता के विश्वास को बार-बार प्राप्त किया।
1972 में वे मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के उपनेता बने। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दायित्व सौंपा गया। इस दौरान उन्होंने कृषि, वन, सिंचाई और सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक संचालन किया। उनकी नीतियों और दूरदर्शिता ने प्रदेश में कृषि विकास, ग्रामीण उन्नति और सामाजिक कल्याण को नई दिशा प्रदान की। श्री यशवंतराव मेघावाले केवल एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। वे तीन बार ग्राम मेघा पंचायत के सरपंच चुने गए और इस दौरान ग्रामीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इसके अतिरिक्त वे तीन बार जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर के संचालक भी रहे, जहाँ उन्होंने सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने में योगदान दिया।
ग्राम मेघा में रहते हुए उन्होंने चिकित्सक के रूप में भी ग्रामीणों की सेवा की। लोगों के दुख-दर्द को समझना और उनकी सहायता करना उनके स्वभाव का अभिन्न हिस्सा था। इसके साथ-साथ उन्हें संगीत और पर्यटन से विशेष लगाव था। वे एक कुशल गायक भी थे, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। 13 अगस्त 1997 को रायपुर में उनका निधन हो गया, परंतु उनका व्यक्तित्व, उनके आदर्श और उनकी जनसेवा आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि यदि किसी व्यक्ति में सेवा भावना, नेतृत्व और समर्पण हो, तो वह समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकता है। इस प्रकार श्री यशवंतराव मेघावाले का जीवन समाज सेवा, जनकल्याण और राष्ट्रभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।